अर्जुनस्य रथाश्वमोचनं कृष्णस्याश्वसेवा च
Arjuna’s Horses Freed; Krishna’s Equine Service
नतुते युधि संत्रास: कार्य: पार्थात् कथठ्चन | अहं हि रक्षिता तात भयात्त्वां नात्र संशय:,वत्स! तो भी तुम्हें युद्धमें किसी प्रकार भी अर्जुनसे डरना नहीं चाहिये; क्योंकि मैं उनके भयसे तुम्हारी रक्षा करनेवाला हूँ--इसमें संशय नहीं है। मेरी भुजाएँ जिसकी रक्षा करती हों, उसपर देवताओंका भी जोर नहीं चल सकता। मैं ऐसा व्यूह बनाऊँगा, जिसे अर्जुन पार नहीं कर सकेंगे
na tu te yudhi saṁtrāsaḥ kāryaḥ pārthāt kathaṁcana | ahaṁ hi rakṣitā tāta bhayāt tvāṁ nātra saṁśayaḥ |
ವತ್ಸ! ಯುದ್ಧದಲ್ಲಿ ಪಾರ್ಥನ (ಅರ್ಜುನನ) ಬಗ್ಗೆ ನಿನಗೆ ಯಾವ ರೀತಿಯ ಭಯವೂ ಇರಬಾರದು. ನಾನು ನಿನ್ನ ರಕ್ಷಕನು; ಇದರಲ್ಲಿ ಸಂಶಯವಿಲ್ಲ.
संजय उवाच