Brahma-vidyā: Satya–Tapas and the Enumeration of Tattvas
Arjuna–Vāsudeva framed dialogue
के पन्थान: शिवाश्र स्यु: कि सुखं कि च दुष्कृतम् एतान् मे भगवन् प्रश्नान् याथातथ्येन सुव्रत,कौन-कौन-से मार्ग कल्याण करनेवाले हैं? सर्वोत्तम सुख क्या है? और पाप किसे कहते हैं? श्रेष्ठ व्रबरका आचरण करनेवाले गुरुदेव! मेरे इन प्रश्नोंका आप यथार्थरूपसे उत्तर देनेमें समर्थ हैं। धर्मज्ञोंमें श्रेष्ठ विप्रषें! यह सब जाननेके लिये मेरे मनमें बड़ी उत्कण्ठा है। इस विषयमें इन प्रश्नोंका तत्त्वतः यथार्थ उत्तर देनेमें आपसे अतिरिक्त दूसरा कोई समर्थ नहीं है। अत: आप ही बतलाइये; क्योंकि संसारमें मोक्षधर्मोके तत्त्वके ज्ञानममें आप कुशल बताये गये हैं
śiṣya uvāca | ke panthānaḥ śivāśrā syuḥ? ki sukhaṃ? ki ca duṣkṛtam? etān me bhagavan praśnān yāthātathyena suvrata |
ಶಿಷ್ಯನು ಹೇಳಿದನು—ಯಾವ ಮಾರ್ಗಗಳು ಕಲ್ಯಾಣಕರ? ಪರಮ ಸುಖವೇನು? ಮತ್ತು ದುಷ್ಕೃತ (ಪಾಪ)ವೆಂದರೆ ಏನು? ಓ ಭಗವನ್, ಓ ಸುವ್ರತ, ನನ್ನ ಈ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿಗೆ ಯಥಾರ್ಥವಾಗಿ ಉತ್ತರಿಸಿರಿ.
शिष्य उवाच