आचार्य-क्षमा, देśa–kāla-नīti, तथा भेद-दोषः
Teacher-Reconciliation, Timing-Policy, and the Fault of Factionalism
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ६ श्लोक मिलाकर कुल ४७ श्लोक हैं।) अर हट (0) है षट्चत्वारिशो5 ध्याय: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन वैशम्पायन उवाच उत्तरं सारथिं कृत्वा शर्मी कृत्वा प्रदक्षिणम् । आयुध॑ सर्वमादाय प्रययौ पाण्डवर्षभ:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! उत्तरको सारथि बना शमी वृक्षकी परिक्रमा करके अपने सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्र लेकर पाण्डवश्रेष्ठ अर्जुन युद्धके लिये चले
vaibamp01yana uv01ca |
uttara s01rathi kftv01 bam2b kftv01 pradaksi47am |
01yudha sarvam 01d01ya prayayau p01470avar63abha25 ||
វៃសម្បាយនៈបាននិយាយថា៖ «ឱ ជនមេជ័យ! អរជុន—អ្នកប្រសើរបំផុតក្នុងចំណោមបណ្ឌវ—បានធ្វើឧត្តរៈជាសារថី ហើយបានដើរប្រទក្សិណ (វង់ជុំ) ជុំវិញដើមឈើ សមី; បន្ទាប់មកយកអាវុធទាំងអស់ ហើយចេញដំណើរទៅសមរភូមិ។»
वैशम्पायन उवाच