एवं युक्ताड्ररूपस्य लक्षणै: सूचितस्य च । केन कर्मविपाकेन क्लीबत्वमिदमागतम्,(वह चिन्ता इस प्रकार है--) आपका एक-एक अवयव तथा रूप सब प्रकारसे उपयुक्त है। आप लक्षणोंद्वारा भी अलौकिक सूचित हो रहे हैं। ऐसी दशामें भी किस कर्मके परिणामसे आपको यह नपुंसकता प्राप्त हुई है?
«រូបរាង និងអវយវៈរបស់អ្នក សមស្របគ្រប់យ៉ាង ហើយតាមលក្ខណៈសញ្ញាទាំងឡាយ ក៏បង្ហាញថាអ្នកមានភាពអស្ចារ្យលើសធម្មតា។ ទោះជាយ៉ាងនេះក្តី តើដោយផលវិបាកនៃកម្មអ្វី បានធ្វើឲ្យអ្នកទទួលបានភាពជានពុংসកនេះ?»
उत्तर उवाच