द्रौपदी-शैब्यसंवादः — Draupadī’s Identification and Counsel on Hospitality
अहो नाह॑मिदं कर्म कष्टं दुश्चरितं कृतम् । स्वयं दुर्बुद्धिना मोहाद् येन प्राप्तोडस्मि संशयम्,अहो! यह कुकर्म मेरे योग्य नहीं था। मुझ दुर्बुद्धिने स्वयं ही मोहवश दु:खदायक दुष्कर्म कर डाला; जिससे (गन्धर्वोका बंदी हो जानेके कारण) मेरा जीवन संदिग्ध हो गया
អាហោ! ការប្រព្រឹត្តអំពើដ៏លំបាក និងអាក្រក់នេះ មិនសមនឹងខ្ញុំឡើយ។ ខ្ញុំដែលមានបញ្ញាខ្សោយ បានធ្វើអំពើទុច្ចរិតដ៏ឈឺចាប់នេះដោយខ្លួនឯង ព្រោះតែភាពវង្វេង—ហើយដោយហេតុនោះ ជីវិតខ្ញុំក៏ក្លាយជារឿងមិនប្រាកដ។
दुर्योधन उवाच