उद्योगपर्व — अध्याय ८१: कृष्णस्य दूतप्रयाणम्
Udyoga Parva, Chapter 81: Krishna Sets Out as Envoy
मधुसूदन! कौरवोंके प्रति साम और दाननीतिका प्रयोग करनेसे कोई प्रयोजन सिद्ध नहीं हो सकता। अत: उनपर आपको कभी कृपा नहीं करनी चाहिये ।। साम्ना दानेन वा कृष्ण ये न शाम्यन्ति शत्रव: । योक्तव्यस्तेषु दण्ड: स्वाज्जीवितं परिरक्षता,श्रीकृष्ण! अपने जीवनकी रक्षा करनेवाले पुरुषको चाहिये कि जो शत्रु साम और दानसे शान्त न हों, उनपर दण्डका प्रयोग करे
vaiśampāyana uvāca | sāmnā dānena vā kṛṣṇa ye na śāmyanti śatravaḥ | yoktavyas teṣu daṇḍaḥ svāj jīvitaṃ parirakṣatā ||
វៃសម្បាយនៈបាននិយាយថា៖ «ឱ ក្រឹષ્ણ! ចំពោះសត្រូវដែលមិនស្ងប់ស្ងាត់ដោយការសម្របសម្រួល ឬដោយអំណោយទេ ត្រូវប្រើទណ្ឌកម្មលើពួកគេ។ បុរសដែលប្រាថ្នារក្សាជីវិតខ្លួន គួរប្រើកម្លាំងប្រឆាំងសត្រូវបែបនោះ»។
वैशम्पायन उवाच