Udyoga Parva, Adhyāya 73 — Kr̥ṣṇa’s Appraisal of Bhīma’s Altered Temper and Reaffirmation of Martial Resolve
असुराणां समृद्धानां ज्वलतामिव तेजसा । पर्यायकाले धर्मस्य प्राप्त कलिरजायत,जैसे धर्मके विप्लवका समय उपस्थित होनेपर तेजसे प्रज्वलित होनेवाले समृद्धिशाली असुरोंमें भयंकर कलह उत्पन्न हुआ था, उसी प्रकार हैहयवंशमें मुदावर्त, नीपकुलमें जनमेजय, तालजंघोंके वंशमें बहुल, कृमिकुलमें उद्ण्ड वसु, सुवीरोंके वंशमें अजबिंदु, सुराष्ट्रकुलमें रुषद्धिक, बलीहवंशमें अर्कज, चीनोंके कुलमें धौतमूलक, विदेहवंशमें हयग्रीव, महौजा नामक क्षत्रियोंके कुलमें वरयु, सुन्दरवंशी क्षत्रियोंमें बाहु, दीप्ताक्षकुलमें पुरूरवा, चेदि और मत्स्यदेशमें सहज, प्रवीरवंशमें वृषध्वज, चन्द्रवत्सकुलमें धारण, मुकुटवंशमें विगाहन तथा नन्दिवेगकुलमें शम--ये सभी कुलांगार एवं नराधम क्षत्रिय युगान्तकाल आनेपर ऊपर बताये अनुसार भिन्न-भिन्न कुलोंमें प्रकट हुए थे
asurāṇāṁ samṛddhānāṁ jvalatām iva tejasā | paryāyakāle dharmasya prāpte kalir ajāyata ||
ភីមៈបាននិយាយថា៖ «ដូចជាក្នុងចំណោមអសុរាដែលសម្បូរបែប ហើយឆេះរលោងដោយតេជៈ អំពើជម្លោះដ៏គួរឱ្យភ័យខ្លាចបានកើតឡើង នៅពេលវដ្តកាលបត់បែន ហើយពេលវេលាដែលធម៌ចាប់ផ្តើមស្រកស្រាលបានមកដល់—ដូច្នោះដែរ នៅពេលយុគសម័យជិតដល់ចុង បុរសក្សត្រីយៈទាបថោក និងបំផ្លាញវង្ស បានលេចឡើងក្នុងរាជវង្សជាច្រើន។»
भीम उवाच