उद्योगपर्व — विदुरनीतिः (Adhyāya 37): आयुःक्षयहेतवः, नीतिसूत्राणि, बलभेदाः, पाण्डव-विग्रहदोषदर्शनम्
अपकृत्य बुद्धिमतो दूरस्थोडस्मीति नाश्वसेत् । दीर्घो बुद्धिमतो बाहू याभ्यां हिंसति हिंसित:,बुद्धिमान् पुरुषकी बुराई करके इस विश्वासपर निश्चिन्त न रहे कि मैं दूर हूँ। बुद्धिमानकी (बुद्धिरूप) बाँहें बड़ी लंबी होती हैं, सताया जानेपर वह उन्हीं बाँहोंसे बदला लेता है
កុំធ្វើអំពើអាក្រក់ចំពោះបុរសប្រាជ្ញា ហើយស្ងប់ចិត្តដោយគិតថា «ខ្ញុំនៅឆ្ងាយ»។ ដៃរបស់អ្នកប្រាជ្ញវែងឆ្ងាយ—ពេលត្រូវគេបៀតបៀន គេយកដៃនោះឆ្លើយតបវិញ។
विदुर उवाच