हंस–साध्यसंवादः, वाक्-निग्रहः, महाकुल-लक्षणम्, शान्ति-उपायः
Hamsa–Sādhya Dialogue; Restraint of Speech; Marks of Noble Lineage; Means to Peace
वन राजंस्तव पुत्रो55म्बिकेय सिंहान् वने पाण्डवांस्तात विद्धि । सिंहैर्विहीनं हि वनं विनश्येत् सिंहा विनश्येयु्रते वनेन,राजन! अम्बिकानन्दन! आपके पुत्र एक वन हैं और पाण्डवोंको उसके भीतर रहनेवाले सिंह समझिये। तात! सिंहसे सूना हो जानेपर वन नष्ट हो जाता है और वनके बिना सिंह भी नष्ट हो जाते हैं
vana rājan tava putro ’mbikeya siṁhān vane pāṇḍavāṁs tāta viddhi | siṁhair vihīnaṁ hi vanaṁ vinaśyet siṁhā vinaśyeyur ṛte vanena, rājan |
វិទុរាបាននិយាយថា៖ «ព្រះរាជា! កូនប្រុសនៃអំបិកា! ចូរយល់ថា កូនរបស់អ្នកដូចជាព្រៃមួយ ហើយបណ្ឌវទាំងឡាយដូចជាសត្វសិង្ហដែលស្នាក់នៅក្នុងព្រៃនោះ។ ព្រៃដែលគ្មានសិង្ហ នឹងរលាយវិនាស; ហើយសិង្ហក៏វិនាសដែរ ប្រសិនបើគ្មានព្រៃ។ ដូច្នេះ សុខសាន្តរបស់ទាំងពីរ អាស្រ័យលើការការពារ និងការរស់នៅរួមគ្នា។»
विदुर उवाच