Udyoga-parva Adhyāya 34 — Vidura’s Counsel on Deliberation, Speech-Discipline, and Dharmic Kingship
विरोचन उवाच प्राजापत्यास्तु वै श्रेष्ठा वयं केशिनि सत्तमा: । अस्माकं खल्विमे लोका: के देवा: के द्विजातय:,विरोचनने कहा--केशिनी! हम प्रजापतिकी श्रेष्ठ संतानें हैं, अतः सबसे उत्तम हैं। यह सारा संसार हमलोगोंका ही है। हमारे सामने देवता क्या हैं? और ब्राह्मण कौन चीज हैं?
វិរោចនៈបាននិយាយថា៖ «ឱ កេសិនី! យើងជាពូជពង្សដ៏ប្រសើររបស់ព្រះប្រជាបតិ ដូច្នេះយើងជាអ្នកល្អឥតខ្ចោះ។ ពិភពលោកទាំងនេះជាកម្មសិទ្ធិរបស់យើង។ ចំពោះយើង ព្រះទេវតាមានអ្វី? ហើយពួកទ្វិជៈ (ព្រាហ្មណ៍) ជាអ្វីទៅ?»
विरोचन उवाच