Drupada’s Alarm and Inquiry Regarding Śikhaṇḍinī (द्रुपदस्य भय-विमर्शः)
व्रतमेतन््मम सदा पृथिव्यामपि विश्रुतम् । स्त्रियां स्त्रीपूर्वके चैव स्त्रीनाम्नि स्त्रीसरूपिणि,न मुज्चेयमहं बाणमिति कौरवनन्दन । कौरवनन्दन! इस भूमण्डलमें भी मेरा यह व्रत प्रसिद्ध है कि जो स्त्री हो, जो पहले स्त्री रहकर पुरुष हुआ हो, जिसका नाम स्त्रीके समान हो तथा जिसका रूप एवं वेष-भूषा स्त्रियोंके समान हो, इन सबपर मैं बाण नहीं छोड़ सकता
vratam etan mama sadā pṛthivyām api viśrutam | striyāṃ strīpūrvake caiva strīnāmni strīsarūpiṇi na muñceyam ahaṃ bāṇam iti kauravanandana |
ភីෂ្មៈបានមានព្រះវាចា៖ «វ្រតនេះរបស់ខ្ញុំ ល្បីល្បាញទូទាំងផែនដីជានិច្ច៖ ខ្ញុំមិនបាញ់ព្រួញទៅលើអ្នកដែលជាស្ត្រី ឬអ្នកដែលធ្លាប់ជាស្ត្រីហើយក្រោយមកក្លាយជាបុរស ឬអ្នកដែលមានឈ្មោះជាស្ត្រី ឬអ្នកដែលរូបរាង និងសម្លៀកបំពាក់ស្រដៀងស្ត្រីឡើយ។ នេះជាការអត់ធ្មត់របស់ខ្ញុំ ឱ កូនចៅកុរុ»។
भीष्म उवाच