Drupada’s Alarm and Inquiry Regarding Śikhaṇḍinī (द्रुपदस्य भय-विमर्शः)
तत आसादयामास पुरोधा द्रुपदं पुरे तस्मै पाउचालको राजा गामर्घ्य च सुसत्कृतम्,नगरमें आकर वे पुरोहित ब्राह्मण महाराज ट्रुपदसे मिले। पांचालराजने सत्कारपूर्वक उन्हें अर्घ्य तथा गौ अर्पण की। उनके साथ राजकुमार शिखण्डी भी थे। राजेन्द्र! पुरोहितने वह पूजा ग्रहण नहीं की और इस प्रकार कहा--
tata āsādayāmāsa purodhā drupadaṃ pure | tasmai pāñcālako rājā gām arghyaṃ ca susatkṛtam ||
ភីष្មៈបាននិយាយថា៖ បន្ទាប់មក ព្រះបូជាចារ្យរាជវង្សបានចូលទៅជួបព្រះបាទ ទ្រុបដ នៅក្នុងរាជធានីរបស់ព្រះអង្គ។ ព្រះរាជា បញ្ចាល បានទទួលស្វាគមន៍ដោយគោរពតាមពិធី ដោយប្រគេនអឃ្យ (ទឹកស្វាគមន៍ពិធីការ) និងគោមួយជាអំណោយកិត្តិយស។ ព្រះរាជកុមារ សិខណ្ឌី ក៏នៅជាមួយគាត់ផងដែរ។ ឱ ព្រះរាជាអធិរាជ! បូជាចារ្យមិនទទួលយកការគោរពនោះទេ ហើយបាននិយាយដូច្នេះ—
भीष्म उवाच