अम्बोपाख्याने तापसानां विचारः तथा होत्रवाहनस्य उपदेशः
Ambā among ascetics; Hotravāhana directs her to Paraśurāma
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अमग्बोपाख्यानपर्वमें अग्बावाक्यविषयक एक सौ चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १७४ ॥/ जज बक। अफि्--"ऋाझ पजञज्चसप्तत्याधेकशततमो< ध्याय: अम्बाका शाल्वके यहाँ जाना और उससे परित्यक्त होकर तापसोंके आश्रममें आना, वहाँ शैखावत्य और अम्बाका संवाद भीष्म उवाच ततो<हं समनुज्ञाप्य कालीं गन्धवतीं तदा । मन्सत्रिण श्चर्विजश्चैव तथैव च पुरोहितान्
bhīṣma uvāca | tato 'haṃ samanujñāpya kālīṃ gandhavatīṃ tadā | mantriṇaś ca dvijān caiva tathaiva ca purohitān |
ភីស្មៈ «បន្ទាប់មក នៅពេលនោះ ខ្ញុំបានសុំលាដោយគួរគាប់គោរពពី កាលី (គន្ធវតី—សត្យវតី) ហើយក៏បានសុំលាពីមន្ត្រីទាំងឡាយ ព្រមទាំងព្រាហ្មណ៍ និងបូជាចារ្យរាជវាំងដែរ»។
भीष्म उवाच