अम्बाया निर्वेदः तपोव्रताभ्यर्थना च
Ambā’s Despair and Petition for Ascetic Vows
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल २४ “लोक हैं।] ऑपन-माज बक। अ्-"ऋ चतुःसप्तरत्यांधेकशततमो< ध्याय: अम्बाका शाल्वराजके प्रति अपना अनुराग प्रकट करके उनके पास जानेके लिये भीष्मसे आज्ञा माँगना भीष्म उवाच ततोऊ<हं भरतश्रेष्ठ मातरं वीरमातरम् । अभिगम्योपसंगृहा दाशेयीमिदमनब्रुवम्,भीष्मजी कहते हैं--भरतश्रेष्ठ तदनन्तर मैंने वीरजननी दाशराजकी कन्या माता सत्यवतीके पास जाकर उनके चरणोंमें प्रणाम करके इस प्रकार कहा--
bhīṣma uvāca | tato'haṃ bharataśreṣṭha mātaraṃ vīramātaram | abhigamyopasaṅgṛhya dāśeyīm idam abruvam ||
ភীष្មបាននិយាយ៖ «បន្ទាប់មក ឱ ព្រះអង្គជាអ្នកល្អបំផុតក្នុងវង្សភារតៈ ខ្ញុំបានចូលទៅជួបមាតារបស់ខ្ញុំ—នាងជាមាតានៃវីរបុរស។ ខ្ញុំបានទៅដល់នាង ហើយគោរពចាប់ជើងនាង (គឺកោតក្រាបនៅជើង) រួចនិយាយពាក្យទាំងនេះទៅកាន់ សត្យវតី កូនស្រីរបស់មេនេសាទ»។
भीष्म उवाच