अग्निस्तुति, इन्द्रदर्शन, नहुष-भयवर्णन
Agni-hymn, discovery of Indra, and the Nahuṣa threat
अफ्-४-क+ घोडशो>< ध्याय: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत ब॒हस्पतिरुवाच त्वमग्ने सर्वदेवानां मुखं त्वमसि हव्यवाट् । त्वमन्तः सर्वभूतानां गूढश्चवरसि साक्षिवत्,बृहस्पति बोले--अग्निदेव! आप सम्पूर्ण देवताओंके मुख हैं। आप ही देवताओंको हविष्य पहुँचानेवाले हैं। आप समस्त प्राणियोंके अन्तःकरणमें साक्षीकी भाँति गूढ़भावसे विचरते हैं
bṛhaspatir uvāca | tvam agne sarvadevānāṁ mukhaṁ tvam asi havyavāṭ | tvam antaḥ sarvabhūtānāṁ gūḍhaś carasi sākṣivat ||
ព្រះព្រហស្បតិបានមានព្រះវាចា៖ «ឱ អគ្និទេវ! អ្នកជាមាត់នៃទេវទាំងអស់; អ្នកជាអ្នកនាំយកហវី (គ្រឿងបូជា) ទៅដល់ពួកទេវ។ អ្នកលាក់ខ្លួននៅក្នុងចិត្តនៃសត្វទាំងអស់ ហើយដើរទៅដូចសាក្សីខាងក្នុង»។
शल्य उवाच