उद्योगपर्व अध्याय १३३ — संजये मातृउपदेशः
Udyoga Parva Adhyaya 133 — A Mother’s Counsel to Saṃjaya
संजयो नामततश्न त्वं न च पश्यामि तत् त्वयि । अन्वर्थनामा भव मे पुत्र मा व्यर्थनामक:,तेरा नाम तो संजय है, परंतु तुझमें इस नामके अनुसार गुण मैं नहीं देख रही हूँ। बेटा! युद्धमें विजय प्राप्त करके अपना नाम सार्थक कर, व्यर्थ संजय नाम न धारण कर
Sañjayo nāmataś ca tvaṁ na ca paśyāmi tat tvayi | anvarthanāmā bhava me putra mā vyarthanāmakaḥ ||
ឈ្មោះរបស់កូនគឺ «សញ្ជ័យ» ប៉ុន្តែម្ដាយមិនឃើញគុណធម៌ដែលធ្វើឲ្យឈ្មោះនោះសមនឹងកូនឡើយ។ កូនអើយ ចូរធ្វើឲ្យឈ្មោះមានន័យ—ឈ្នះជ័យក្នុងសង្គ្រាម ហើយកុំឲ្យពាក់ឈ្មោះ «សញ្ជ័យ» ដោយឥតប្រយោជន៍។
पुत्र उवाच