Udyoga Parva Adhyāya 132 — Vidura’s Counsel on Udyama, Yaśas, and Kṣātra-Dharma
यस्य शूरस्य विक्रान्तैरेधन्ते बान्धवा: सुखम् | त्रिदशा इव शक्रस्य साधु तस्येह जीवितम्,जैसे इन्द्रके पराक्रमसे सब देवता सुखी रहते हैं, उसी प्रकार जिस शूरवीर पुरुषके बल और पुरुषार्थसे उसके भाई-बन्धु सुखपूर्वक उन्नति करते हैं, इस संसारमें उसीका जीवन श्रेष्ठ है
ដូចទេវតាទាំងឡាយសុខសាន្តដោយព្រះឥន្ទ្រមានវីរភាពដែរ មនុស្សវីរបុរសណាដែលដោយកម្លាំង និងការខិតខំរបស់គាត់ ធ្វើឲ្យបងប្អូនញាតិមិត្តរីកចម្រើនដោយសុខ នោះជីវិតរបស់គាត់ក្នុងលោកនេះជាជីវិតប្រសើរ។
पुत्र उवाच