Udyoga-parva Adhyāya 123 — Bhīṣma–Droṇa–Vidura Upadeśa to Duryodhana
Keśava-vākya aftermath
मद् द्वितीयं पुनः पार्थ कः प्रार्थयितुमर्हति । युद्धे प्रतीपमायान्तमपि साक्षात् पुरंदर:,'फिर मैं जिसका सारथि बनकर साथ रहूँ और वह अर्जुन प्रतिपक्षी होकर युद्धके लिये आये, उस समय साक्षात् इन्द्र ही क्यों न हों, कौन अर्जुनके साथ युद्ध करना चाहेगा?
ហើយបើខ្ញុំជាសារថីរបស់បាថ៌ (អរជុន) ឈរជាគូប្រឆាំងមកសង្គ្រាម—សូម្បីតែពុរន្ទរៈ (ឥន្ទ្រ) ដោយផ្ទាល់ ក៏មានអ្នកណាចង់ទៅប្រយុទ្ធនឹងអរជុនដែរ?
वैशम्पायन उवाच