चतुर्षु हुतकल्पेषु राजसिंहमहाग्निषु । पपात मध्ये राजर्षिययाति: पुण्यसंक्षये,वे चारों श्रेष्ठ राजा उन चार विशाल अग्नियोंके समान तेजस्वी थे, जो हविष्यकी आहुति पाकर प्रज्वलित हो रहे हों। राजर्षि ययाति अपना पुण्य क्षीण होनेपर उन्हींके मध्यभागमें गिरे
នៅចន្លោះអ្នកទាំងបួន—ដូចជាអគ្គីធំៗរបស់ព្រះរាជសីហៈ ដែលភ្លឺចែងចាំងដូចអគ្គីទទួលហាវិស្យ—ព្រះរាជឥសីយយាតិបានធ្លាក់ចុះមកកណ្ដាលពួកគេ ពេលបុណ្យកុសលរបស់ព្រះអង្គអស់សព្វ។
नारद उवाच