धन-निरुक्ति तथा गालवस्य गुरुदक्षिणा-प्रसङ्गः
Etymology of Wealth and the Gurudakṣiṇā Predicament of Gālava
सुपर्णो<थाब्रवीद् विप्रं प्रध्यातं वै मया द्विज । इमां सिद्धामितो नेतुं तत्र यत्र प्रजापति:,तब गरुड़ने विप्रवर गालवसे कहा--'ब्रह्मन! मैंने तो अपने मनमें यही सोचा था कि इस सिद्ध तपस्विनीको वहाँ पहुँचा दूँ, जहाँ प्रजापति ब्रह्मा हैं, जहाँ महादेवजी हैं, जहाँ सनातन भगवान् विष्णु हैं तथा जहाँ धर्म एवं यज्ञ है, वहीं इसे निवास करना चाहिये
suparṇo ’thābravīd vipraṁ pradhyātaṁ vai mayā dvija | imāṁ siddhām ito netuṁ tatra yatra prajāpatiḥ ||
បន្ទាប់មក សុប័ណ៌ (គរុឌ) បាននិយាយទៅកាន់ព្រាហ្មណ៍៖ «ឱ ទ្វិជៈ! ខ្ញុំបានសម្រេចក្នុងចិត្តពិតប្រាកដថា នឹងនាំនាងអ្នកតបសីដែលបានសម្រេចសិទ្ធិ នេះចេញពីទីនេះ ទៅកាន់លោកធម៌នោះ ដែលព្រះប្រជាបតិ (ព្រះព្រហ្មា) ស្ថិតនៅ»។
नारद उवाच