Adhyāya 108: Paścima-dik—Varuṇa’s Realm, Sunset Cosmology, and Sacred-Geographic Markers
Suparṇa–Gālava संवाद
एष तस्यापि ते मार्ग: परिचार्यस्य गालव । ब्रृूहि मे यदि गन्तव्यं प्रतीचीं शूणु चापराम्,गालव! तुम मेरे द्वारा परिचर्या पाने (सेवा ग्रहण करने)-के योग्य हो, अतः तुम्हें यह दक्षिण मार्ग बताया है; यदि इस दिशामें चलना हो तो मुझसे कहो अथवा अब तीसरी पश्चिम दिशाका वर्णन सुनो
ឱ កាលវៈ! នេះជាមាគ៌ាសម្រាប់អ្នកផងដែរ—សមស្របនឹងការបម្រើ។ ខ្ញុំបានប្រាប់អ្នកអំពីផ្លូវខាងត្បូងនេះហើយ; បើអ្នកចង់ដំណើរតាមទិសនេះ ចូរប្រាប់ខ្ញុំ; ឬមិនដូច្នោះទេ ចូរស្តាប់ការពិពណ៌នាអំពីទិសខាងលិចជាទីបី។
युपर्ण उवाच