Śānti Parva Adhyāya 43 — Yudhiṣṭhira’s Stuti of Kṛṣṇa
Assembly Hymn of Many Names
पुन: प्राप्तमिदं राज्यं पितृपैतामहं मया । नमस्ते पुण्डरीकाक्ष पुनः पुनररिंदम,'यदुसिंह श्रीकृष्ण! आपकी ही कृपा, नीति, बल, बुद्धि और पराक्रमसे मुझे पुनः अपने बाप-दादोंका यह राज्य प्राप्त हुआ है। शत्रुओंका दमन करनेवाले कमलनयन! आपको बारंबार नमस्कार है
«ខ្ញុំបានយកវិញនូវរាជ្យនេះ ដែលជាមរតកបិតាបុព្វបុរស។ ឱ ព្រះក្រឹෂṇa ភ្នែកដូចផ្កាឈូក ឱ អ្នកបង្ក្រាបសត្រូវ! ខ្ញុំសូមក្រាបបង្គំថ្វាយនមស្ការ ព្រះអង្គម្តងហើយម្តងទៀត»។
वैशम्पायन उवाच