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Shloka 3

नाग उवाच अनुक्त्वा हृद्गतं कार्य क्वेदानीं प्रस्थितो भवान्‌ । उच्यतां द्विज यत्‌ कार्य यदर्थ त्वमिहागत:,नागने कहा--विप्रवर! आपने अभी अपने मनकी बात तो बतायी ही नहीं, फिर इस समय आप कहाँ चले जा रहे हैं? आपका जो कार्य है, जिसके लिये आप यहाँ आये हैं, उसे बताइये तो सही

នាគបាននិយាយថា៖ «ឱ ព្រាហ្មណ៍ប្រសើរ! អ្នកមិនទាន់បានប្រាប់អ្វីដែលស្ថិតនៅក្នុងចិត្តអ្នកទេ; ហេតុអ្វីបានជាឥឡូវនេះអ្នកចង់ចេញដំណើរ? សូមប្រាប់មក—កិច្ចការអ្វីដែលអ្នកត្រូវធ្វើ និងគោលបំណងអ្វីដែលនាំឲ្យអ្នកមកទីនេះ»។

नाग उवाच