Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
वायुदेव उवाच मा कृथा: पुरुषव्याप्र शोकं त्वं गात्रशोषणम् । नहि ते सुलभा भूयो ये हतास्मिन् रणाजिरे,भगवान् श्रीकृष्ण बोले--पुरुषसिंह! तुम शोक न करो। शोक तो शरीरको सुखा देनेवाला होता है। इस समरांगणमें जो वीर मारे गये हैं, वे फिर सहज ही मिल सकें, यह सम्भव नहीं है
ព្រះវាយុទេវបានមានព្រះបន្ទូលថា៖ «ឱ បុរសក្លាហាន! កុំធ្វើទុក្ខសោកឡើយ។ ទុក្ខសោកគឺជាអ្វីដែលធ្វើឲ្យរាងកាយស្ងួតស្រក។ វីរបុរសទាំងឡាយដែលបានស្លាប់នៅលើសមរភូមិនេះ មិនអាចត្រឡប់មកឲ្យបានងាយទៀតឡើយ»។
वायुदेव उवाच