कपिल–स्यूमरश्मि संवादः
Kapila and Syūmaraśmi on Renunciation, Householder Support, and Epistemic Authority
भूमिं भूमिशयांश्वैव हन्ति काष्ठमयोमुखम् । तथैवानडुहो युक्तान् समवेक्षस्व जाजले,जाजले! जिसके मुखपर फाल जुड़ा हुआ है, वह हल पृथ्वीको पीड़ा देता है और उसके भीतर रहनेवाले जीवोंका भी वध कर डालता है और उसमें जो बैल जोते जाते हैं, उनकी दुर्दशापर भी दृष्टिपात करो
«ឱ ជាជលេ! ចូរមើលឲ្យឃើញថា នង្គ័លដែលមានមុខដែកដូចមាត់ឈើនោះ ធ្វើឲ្យដីរងទុក្ខ ហើយក៏សម្លាប់សត្វជីវិតដែលស្នាក់នៅក្នុងដីផងដែរ។ ហើយចូរមើលទុក្ខវេទនារបស់គោឈ្មោលដែលត្រូវចងភ្ជាប់ឲ្យអូសនង្គ័លនោះផង!»
तुलाधार उवाच