Dasyu-maryādā and Buddhi-guided Rāja-nīti (दस्युमर्यादा तथा बुद्धिप्रधान-राजनीति)
कृतवैरे न विश्वास: कार्यस्त्विह सुहृद्यपि । छन्न॑ संतिष्ठते वैरं गूढो5ग्निरिव दारुषु,जिसने वैर बाँध लिया हो, ऐसे सुहृदपर भी इस जगतमें विश्वास नहीं करना चाहिये; क्योंकि जैसे लकड़ीके भीतर आग छिपी रहती है, उसी प्रकार उसके हृदयमें वैरभाव छिपा रहता है
ចំពោះអ្នកដែលបានចងសត្រូវភាពរួចហើយ—even បើជាមិត្តស្និទ្ធក៏ដោយ—ក្នុងលោកនេះមិនគួរជឿទុកចិត្តឡើយ; ព្រោះដូចភ្លើងលាក់ខ្លួននៅក្នុងឈើ សត្រូវភាពក៏លាក់នៅក្នុងចិត្តរបស់គេដូច្នោះដែរ។
ब्रह्मदत्त उवाच