Jaitrya-nimitta: Signs of Prospective Victory and the Priority of Conciliation (जयलक्षण-निमित्त तथा सान्त्व-प्रधान नीति)
दैवे पूर्व प्रकृपिते मानुषे कालचोदिते । तद्विद्वांसोनुपश्यन्ति ज्ञानदिव्येन चक्षुषा,कालसे प्रेरित हुए मनुष्यपर पहले दैवका प्रकोप होता है। उसे विद्वान् पुरुष जब ज्ञानमयी दिव्यदृष्टिसे देख लेते हैं, तब उसके प्रतीकारको जाननेवाले वे पुरुष उसके प्रायश्चित्तका विधान--जप, होम आदि मांगलिक कृत्य करते हैं और उस अहितकारक दैवी उपद्रवको शान्त कर देते हैं
bhaṣma uvāca | daive pūrvaṁ prakupite mānuṣe kālacodite | tad vidvāṁso ’nupaśyanti jñānadivyena cakṣuṣā ||
ភីෂ្មៈបានមានព្រះវាចា៖ ពេលអំណាចទេវៈចាប់ផ្តើមកើតកំហឹងជាមុន ហើយមនុស្សត្រូវបាន “កាលៈ” ជំរុញឲ្យរត់ទៅមុខ—អ្នកប្រាជ្ញយល់ឃើញវាដោយ “ភ្នែកទិព្វនៃចំណេះដឹង”។ ពួកគេដឹងវិធានប្រឆាំង ហើយកំណត់ពិធីសងបាប និងកិច្ចមង្គល ដូចជា ការសូត្រមន្ត និងការបូជាភ្លើង ដើម្បីបន្ធូរប្រទូសទេវៈដ៏បង្កគ្រោះនោះ។
भीष्म उवाच