ऋषिसमागमः — युधिष्ठिरस्य शोकवर्णनम्
Sage Assembly and Yudhiṣṭhira’s Articulation of Grief
यः स नागायुतबलो लोके<प्रतिरथो रणे । सिंहखेलगतिर्धीमान् घृणी दाता यतव्रत:,जिनमें दस हजार हाथियोंका बल था, संसारमें जिनका सामना करनेवाला दूसरा कोई भी महारथी नहीं था, जो रणभूमिमें सिंहके समान खेलते हुए विचरते थे, जो बुद्धिमान् दयालु, दाता, सयंमपूर्वक व्रतका पालन करनेवाले और धुृतराष्ट्रपुत्रोंके आश्रय थे; अभिमानी, तीव्रपराक्रमी, अमर्षशील, नित्य रोषमें भरे रहनेवाले तथा प्रत्येक युद्धमें हमलोगोंपर अस्त्रों एवं वाग्बाणोंका प्रहार करनेवाले थे, जिनमें विचित्र प्रकारसे युद्ध करनेकी कला थी, जो शीघ्रतापूर्वक अस्त्र चलानेवाले, धरनुर्वेदके विद्वान् तथा अद्भुत पराक्रम कर दिखानेवाले थे, वे कर्ण गुप्तरूपसे उत्पन्न हुए कुन्तीके पुत्र और हमलोगोंके बड़े भाई थे; यह बात हमारे सुननेमें आयी है
yāḥ sa nāgāyutabalo loke 'pratiratho raṇe | siṁhakhelagatirdhīmān ghṛṇī dātā yatavrataḥ |
យុធិષ્ઠិរៈបានមានព្រះបន្ទូលថា៖ «គាត់មានកម្លាំងស្មើដប់ពាន់ដំរី; ក្នុងលោកនេះ មិនមានមហារថីណាម្នាក់អាចប្រកួតស្មើគាត់ក្នុងសង្គ្រាមបានឡើយ។ គាត់ដើរលេងលើសមរភូមិដូចសិង្ហកំពុងលេង—មានប្រាជ្ញា មានមេត្តា ជាអ្នកឧបត្ថម្ភទាន ហើយមាំមួនក្នុងការអត់ធ្មត់ និងវត្តសីល។ គាត់ជាទីពឹងរបស់កូនៗធ្រិតរាស្ត្រ; ប៉ុន្តែដោយមោទនភាព ក្លាហានខ្លាំង និងឆាប់ខឹង គាត់តែងវាយប្រហារយើងរាល់សង្គ្រាម ដោយអាវុធ និងពាក្យសម្តីដូចព្រួញ។ ជំនាញក្នុងល្បិចប្រយុទ្ធចម្រុះ បាញ់អាវុធបានរហ័ស ជ្រាបជ្រែងវិជ្ជាធនូរវេទ ហើយអាចបង្ហាញវីរភាពអស្ចារ្យ—គាត់គឺ កರ್ಣៈ កូនប្រុសរបស់គុនទី ដែលកើតដោយសម្ងាត់ និងជាបងធំរបស់យើង; ដូចដែលយើងបានឮមក»។
युधिछिर उवाच