कृपोपदेशः — द्रौणेरनिद्रा च
Kṛpa’s Counsel and Drauṇi’s Sleepless Resolve
अनुयास्याव सहितौ धन्विनौ परतापनौ | रथिन त्वरया यान्तं रथमास्थाय दंशितौ,तुम व्यग्रता छोड़कर विश्राम करो और इस रातमें सुखपूर्वक सो लो। कल खबरेरे युद्धके लिये प्रस्थान करते समय तुम-जैसे नरश्रेष्ठ वीरके पीछे शत्रुओंको संताप देनेवाले हम और कृतवर्मा धनुष लेकर एक साथ चलेंगे। बड़ी उतावलीके साथ आगे बढ़ते हुए रथी अश्वत्थामाके साथ हम दोनों भी कवच धारण करके रथपर आखरूढ़ हो यात्रा करेंगे
anuyāsyāva sahitau dhanvinau paratāpanau | rathin tvarayā yāntaṁ ratham āsthāya daṁśitau ||
ក្រឹបៈបាននិយាយថា៖ «យើងពីរនាក់—អ្នកទាញធ្នូ និងអ្នកបង្កទុក្ខដល់សត្រូវ—នឹងដើរតាមជាមួយគ្នា។ យើងនឹងឡើងរថ ដាក់អាវក្រោះពេញលេញ ហើយប្រញាប់ទៅតាមពីក្រោយរថរបស់អ្នកយុទ្ធរថ ដែលកំពុងរុញទៅមុខ»។
कृप उवाच