याज्ञसेनी-प्रश्नः
Draupadī’s Question in the Assembly
आयतिं च तदात्वं च उभे सद्यो व्यनाशयत् । तदर्थकामस्तद्वत् त्वं मा द्रुह: पाण्डवान् नूप,अतः उसने उस धनके लोभसे उन पक्षियोंका वध करके वर्तमान और भविष्य दोनों लाभोंका तत्काल नाश कर दिया। राजन! इसी प्रकार आप पाण्डवोंका सारा धन हड़प लेनेके लोभसे उनके साथ द्रोह न करें
វិទុរៈបាននិយាយថា៖ «ដោយលោភចំពោះទ្រព្យនោះ គាត់បានសម្លាប់បក្សីទាំងនោះ ហើយបានបំផ្លាញទាំងផលប្រយោជន៍បច្ចុប្បន្ន និងអនាគតភ្លាមៗ។ ព្រះរាជា! ដូចគ្នានេះដែរ សូមកុំធ្វើក្បត់ចំពោះបណ្ឌវ ដោយលោភចង់លួចយកទ្រព្យសម្បត្តិទាំងអស់របស់ពួកគេឡើយ»។
विदुर उवाच