सभा-पर्व, अध्याय ६१ — द्रौपदी-प्रश्नः, सभाधर्मः, सत्यवचन-नियमः
महाहमाल्याभरणा: सुवस्त्रा श्न्दनो क्षिता: । मणीन् हेम च बिश्रत्यश्षतुःषष्टिविशारदा:,युधिष्ठिरने कहा--मेरे पास एक लाख तरुणी दासियाँ हैं, जो सुवर्णमय मांगलिक आभूषण धारण करती हैं। जिनके हाथोंमें शंखकी चूड़ियाँ, बाँहोंमें भुजबंद, कण्ठमें निष्कोंका हार तथा अन्य अंगोंमें भी सुन्दर आभूषण हैं। बहुमूल्य हार उनकी शोभा बढ़ाते हैं। उनके वस्त्र बहुत ही सुन्दर हैं। वे अपने शरीरमें चन्दनका लेप लगाती हैं, मणि और सुवर्ण धारण करती हैं तथा चौसठ कलाओंमें निपुण हैं। नृत्य और गानमें भी वे कुशल हैं। ये सब-की-सब मेरे आदेशसे स्नातकों, मन्त्रियों तथा राजाओंकी सेवा-परिचर्या करती हैं। राजन! यह मेरा धन है, जिसे दाँवपर लगाकर मैं तुम्हारे साथ खेलता हूँ
mahāhamālyābharaṇāḥ suvāstrāś candanokṣitāḥ | maṇīn hema ca bibhratyaś catuḥṣaṣṭi-viśāradāḥ ||
យុធិષ્ઠិរ បានមានព្រះបន្ទូលថា៖ «ខ្ញុំមានក្រុមទាសីវ័យក្មេងដ៏ធំមហិមា តុបតែងដោយកម្រងផ្កា និងគ្រឿងអលង្ការមង្គល ពាក់សម្លៀកបំពាក់ល្អប្រណិត ហើយលាបក្រអូបចន្ទន៍។ ពួកនាងពាក់មណី និងមាស ហើយជំនាញក្នុងសិល្បៈ៦៤ ប្រសប់ទាំងច្រៀងទាំងរាំ។ តាមបញ្ជារបស់ខ្ញុំ ពួកនាងបម្រើស្នាតកៈ អមាត្យ និងស្តេចទាំងឡាយ។ ព្រះរាជា! នេះជាទ្រព្យរបស់ខ្ញុំ—ខ្ញុំដាក់វាជាភ្នាល់លេងជាមួយព្រះអង្គ»។
युधिछिर उवाच