(यथैकेन त्वया पूर्व कृतो दिग्विजय: पुरा । मरुत्सूनोर्यथा सूनुर्घातित: शक्रदत्तया ।। तदेतत् सर्वमालम्ब्य जहि पार्थ धनंजयम् ।) 'जैसे पूर्वकालमें तुमने अकेले ही सम्पूर्ण दिशाओंपर विजय पायी थी, इन्द्रकी दी हुई शक्तिसे भीमपुत्र घटोत्कचका वध किया था, उसी तरह इस सारे बल-पराक्रमका आश्रय ले कुन्तीपुत्र अर्जुनको मार डालो'। कर्ण उवाच प्रकृतिस्थो5सि मे शल्य इदानीं सम्मतस्तथा । प्रतिभासि महाबाहो मा भैषीस्त्वं धनंजयात्,कर्णने कहा--शल्य! इस समय तुम अपने स्वरूपमें प्रतिष्ठित हो और मुझसे सहमत जान पड़ते हो। महाबाहो! तुम अर्जुनसे डरो मत
yathaikena tvayā pūrvaṁ kṛto digvijayaḥ purā | marutsūnor yathā sūnur ghātitaḥ śakradattayā || tad etat sarvam ālambya jahi pārtha dhanañjayam || karṇa uvāca—prakṛtistho ’si me śalya idānīṁ sammataḥ tathā | pratibhāsi mahābāho mā bhaiṣīs tvaṁ dhanañjayāt ||
«ដូចមុនកាលដែលអ្នកតែម្នាក់ឯងបានធ្វើដំណើរឈ្នះទិសទាំងអស់ ហើយដូចដែលកូនរបស់ភីមៈ—ឃដោត្កច—ត្រូវបានសម្លាប់ដោយអាវុធទេវៈដែលឥន្ទ្រាបានប្រទាន—ដូច្នេះឥឡូវនេះ ចូរពឹងផ្អែកលើកម្លាំង និងវីរភាពទាំងមូលនោះ សម្លាប់បಾರ್ಥ ធនញ្ជយ (អរជុន) ចុះ»។ បន្ទាប់មក កರ್ಣបានបន្ថែមថា៖ «ឝល្យ! ឥឡូវនេះអ្នកហាក់ដូចជាស្ថិតនៅក្នុងសភាពពិតរបស់ខ្លួន និងយល់ស្របជាមួយខ្ញុំ។ ឱ មហាបាហូ! កុំភ័យធនញ្ជយឡើយ»។
कर्ण उवाच