सहसैकरथ: पार्थस्त्वामभ्येति परंतप: । क्रोधरक्तेक्षण: क्रुद्धों जिघांसु: सर्वपार्थिवान्,“तुमने धर्मराज युधिष्ठिरको अत्यन्त घायल करके रथहीन कर दिया है। शिखण्डी, द्रपदकुमार धृष्टद्युम्न, सात्यकि, द्रौपदीके पुत्रों, उत्तमौजा, युधामन्यु तथा दोनों भाई नकुल- सहदेवको भी तुम्हारे हाथों बहुत चोट पहुँची है। यह सब देखकर शत्रुओंको संताप देनेवाले कुन्तीकुमार अर्जुन अत्यन्त कुपित हो उठे हैं। उनके नेत्र रोषसे रक्तवर्ण हो गये हैं, अतः वे समस्त राजाओंका संहार करनेकी इच्छासे एकमात्र रथके साथ सहसा तुम्हारे ऊपर चढ़े आ रहे हैं
arjuna uvāca | sahasaikarathaḥ pārthas tvām abhyeti paraṃtapaḥ | krodharakte kṣaṇaḥ kruddho jighāṃsuḥ sarvapārthivān |
អర్జុនបាននិយាយ៖ «បារថៈ អ្នកដុតបំផ្លាញសត្រូវ កំពុងបើករទេះតែមួយរបស់គាត់ វាយប្រហារមកលើអ្នកដោយរហ័ស ក្នុងកំហឹងភ្លាមៗ។ ភ្នែកគាត់ក្រហមដោយកំហឹង; កំពុងខឹងខ្លាំង គាត់ប្រាថ្នាសម្លាប់ស្តេចទាំងអស់»។
अजुन उवाच