Karṇa’s advance against the Pāṇḍava host; Arjuna’s clash with the Saṃśaptakas (कर्णस्य पाण्डवसेनाप्रवेशः—अर्जुनस्य संशप्तकसंप्रहारः)
एकं च भगवन्तं ते नानारूपमकल्पयन् । आत्मन: प्रतिरूपाणि रूपाण्यथ महात्मनि,तप उग्र॑ समास्थाय नियमे परमे स्थिता: । उस समय देवताओंने दैत्योंको परास्त कर दिया था, यह हमारे सुननेमें आया है। राजन! दैत्योंके परास्त हो जानेपर तारकासुरके तीन पुत्र ताराक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली उग्र तपस्याका आश्रय ले उत्तम नियमोंका पालन करने लगे परस्परस्य चापश्यन् सर्वे परमविस्मिता: । उन्होंने एक ही भगवान् शिवको अपनी भावनाके अनुसार अनेक रूपोंमें कल्पित किया। उन परमात्मामें अपने तथा दूसरोंके प्रतिबिम्ब देखे। यह सब देखकर परस्पर दृष्टिपात करके वे सब-के-सब अत्यन्त आश्वर्यचकित हो उठे
ekaṃ ca bhagavantaṃ te nānārūpam akalpayan | ātmanaḥ pratirūpāṇi rūpāṇy atha mahātmani | tapa ugraṃ samāsthāya niyame parame sthitāḥ | parasparasya cāpaśyan sarve paramavismitāḥ |
ទុរយោធនៈបាននិយាយថា៖ «ពួកគេបានស្រមៃព្រះមានព្រះភាគតែមួយ (ព្រះសិវៈ) ជារូបរាងជាច្រើន តាមការគិតនៃខ្លួនឯង។ ក្នុងព្រះមហាត្មាអធិឋាននោះ ពួកគេបានឃើញរូបរាងជាការឆ្លុះបញ្ចាំងនៃខ្លួនឯង និងរបស់គ្នាទៅវិញទៅមក។ ដោយបានទទួលយកតបៈដ៏តឹងរឹង និងតាំងខ្លួនក្នុងវិន័យកម្រិតខ្ពស់បំផុត ពួកគេបានមើលគ្នាទៅវិញទៅមក—ហើយទាំងអស់គ្នាត្រូវបានគ្របដណ្តប់ដោយការភ្ញាក់ផ្អើលយ៉ាងខ្លាំង»។
दुर्योधन उवाच