Karṇa’s Camp-Council Discourse: Dhṛtarāṣṭra’s Lament, Sañjaya’s Counsel, and Karṇa’s Request for Śalya
Book 8, Chapter 22
ऑपनआक्ाता बा अकाल त्रयोविशो5 ध्याय: सहदेवके द्वारा दःशासनकी पराजय संजय उवाच सहदेवं तथा क्रुद्धं दहन्तं तव वाहिनीम् । दुःशासनो महाराज भ्राता भ्रातरमभ्ययात्,संजय कहते हैं--महाराज! सहदेव क्रोधमें भरकर आपकी विशाल सेनाको दग्ध करने लगे। उस समय भाई दुःशासनने अपने उस भ्राताका सामना किया
sañjaya uvāca | sahadevaṃ tathā kruddhaṃ dahantaṃ tava vāhinīm | duḥśāsano mahārāja bhrātā bhrātaram abhyayāt |
សញ្ជ័យបាននិយាយថា៖ «មហារាជ! សហទេវៈ កើតកំហឹងខ្លាំង បានចាប់ផ្តើមឆេះឆាបកាត់កងទ័ពដ៏ធំរបស់ព្រះអង្គ។ នៅពេលនោះ បងប្រុសទុះសាសនៈ បានចូលមកប្រឈមមុខនឹងប្អូនប្រុសរបស់ខ្លួន។»
संजय उवाच