भीष्मविक्रमदर्शनं तथा क्रौञ्चारुणव्यूहविधानम् | Bhīṣma’s Ascendancy and the Organization of the Krauñcāruṇa Formation
सम्बन्ध--इस प्रकार अपनी स्थितिका वर्णन करते हुए गीताके उपदेशकी और हक 3. रूपकी स्युतिका महत्त्व प्रकट करके; अब संजय धुतराष्ट्रसे की विजयकी निश्चित सम्भावना प्रकट करते हुए इस अध्यायका उपसंहार करते हैं-- यत्र योगेश्वर: कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धर: । तत्र श्रीविजयो भूतिर्धुवा नीतिर्मतिर्मम,हे राजन! जहाँ योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गाण्डीव-धनुषधारी अर्जुन हैं, वहींपर श्री, विजय, विभूति और अचल नीति है--ऐसा मेरा मत है*.
sañjaya uvāca | yatra yogeśvaraḥ kṛṣṇo yatra pārtho dhanuḥdharaḥ | tatra śrīr vijayo bhūtir dhruvā nītir matir mama, he rājan ||
សញ្ជ័យបានទូលថា៖ ព្រះមហាក្សត្រ! ទីណាដែលព្រះក្រឹṣṇa ជាព្រះអម្ចាស់នៃយោគ (យោគេស្វរ) ស្ថិតនៅ និងទីណាដែលអរជុន អ្នកកាន់ធ្នូ ស្ថិតនៅ—ទីនោះប្រាកដជាមានសិរីល្អ ជ័យជម្នះ វិបុលភាព និងនីតិដ៏មាំមួន។ នេះជាការវិនិច្ឆ័យដ៏ពិចារណារបស់ខ្ញុំ។
संजय उवाच