Viśvarūpa-darśana (The Vision of the Universal Form) — महायोगेश्वरस्य विश्वरूपदर्शनम्
सम्बन्ध-- भगवान्की भ्क्तिका भयवत्प्राप्तिरूप महान् फल होनेपर भी उसके साधनमें कोई कठिनता नहीं है; बल्कि उसका साधन बहुत ही युगम है--यही बात दिखलानेके लिये भ्रगवान् कहते हैं-- पत्र॑ पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति । तदहं भक््त्युह्वतमश्नामि5 ३ प्रयतात्मन:,जो कोई भक्त मेरे लिये प्रेमसे पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है,< उस शुद्धबुद्धि निष्काम प्रेमी भक्तका प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुणरूपसे प्रकट होकर प्रीतिसहित खाता हूँ
patraṁ puṣpaṁ phalaṁ toyaṁ yo me bhaktyā prayacchati | tad ahaṁ bhakty-upahṛtam aśnāmi prayatātmanaḥ ||
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अजुन उवाच