Viśvarūpa-darśana (The Vision of the Universal Form) — महायोगेश्वरस्य विश्वरूपदर्शनम्
ते तं भुक्त्वा स्वर्गलोकं विशालं क्षीणे पुण्ये मर्त्यलोक॑ विशन्ति । एवं त्रयीधर्ममनुप्रपन्ना गतागतं कामकामा लभन्ते,वे उस विशाल स्वर्गलोकको भोगकर पुण्य क्षीण होनेपर मृत्युलोकको प्राप्त होते हैं। इस प्रकार स्वर्गके साधनरूप तीनों वेदोंमें कहे हुए सकामकर्मका आश्रय लेनेवाले और भोगोंकी कामनावाले पुरुष बार-बार आवागमनको प्राप्त होते हैं, अर्थात् पुण्यके प्रभावसे स्वर्गमें जाते हैं और पुण्य क्षीण होनेपर मृत्युलोकमें आते हैं:
te taṁ bhuktvā svargalokaṁ viśālaṁ kṣīṇe puṇye martyalokaṁ viśanti | evaṁ trayīdharmam anuprapannā gatāgataṁ kāmakāmā labhante ||
ពួកគេបានរីករាយនឹងសួគ៌លោកដ៏ធំទូលាយនោះហើយ; ពេលបុណ្យរបស់ពួកគេអស់សព្វ គេត្រឡប់ចូលមកលោកមនុស្សវិញ។ ដូច្នេះ អ្នកដែលពឹងផ្អែកលើធម៌នៃវេទទាំងបី ដើម្បីសម្រេចបំណងនៃការរីករាយ—មនុស្សដែលត្រូវបានជំរុញដោយក្តីប្រាថ្នា—បានទទួលតែការមកទៅមកជាបន្តបន្ទាប់ប៉ុណ្ណោះ។
अजुन उवाच