कर्मयोग–ज्ञानयज्ञ–अवतारोपदेश
Karma-Yoga, Jñāna-Yajña, and Avatāra Instruction
न जायते प्रियते वा कदाचि- न्ञायं भूत्वा भविता वा न भूय: । अजो नित्य: शाश्वतो<यं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे,यह आत्मा किसी कालमें भी न तो जन्मता है और न मरता ही है तथा न यह उत्पन्न होकर फिर होनेवाला ही है; क्योंकि यह अजन्मा, नित्य, सनातन और पुरातन है, शरीरके मारे जानेपर भी यह नहीं मारा जाताई
អាត្មានេះ មិនកើតឡើងឡើយ ហើយក៏មិនស្លាប់ឡើយ នៅពេលណាក៏ដោយ; វាមិនមែនកើតឡើងហើយបន្ទាប់មកនឹងក្លាយជាអ្វីមួយទៀតឡើយ។ វាជាអជាតៈ និច្ច សនាតន និងបុរាណ; ទោះរាងកាយត្រូវបានសម្លាប់ ក៏អាត្មានេះមិនត្រូវបានសម្លាប់ទេ។
संजय उवाच