भीष्मपर्व — अध्याय ११०: पार्थभीमयोः प्रहारः तथा भीष्माभिमुखं संग्रामविस्तारः
Arjuna and Bhima’s pressure; escalation toward Bhishma
(कथमस्मद्विध: कृष्ण जानन् धर्म सनातनम् | न्यस्तशस्त्रे च वृद्धे च प्रहरेद्धि पितामहे ।।) “श्रीकृष्ण! अपने सनातन धर्मको जाननेवाला मेरे-जैसा पुरुष हथियार डालकर बैठे हुए अपने बूढ़े पितामहपर प्रहार कैसे करेगा? वायुदेव उवाच प्रतिज्ञाय वध॑ जिष्णो पुरा भीष्मस्य संयुगे | क्षत्रधर्मे स्थित: पार्थ कथं नैनं हनिष्यसि,भगवान् श्रीकृष्ण बोले--विजयी कुन्तीकुमार! तुम क्षत्रियधर्ममें स्थित हो। युद्धमें तुम पहले भीष्मके वधकी प्रतिज्ञा करके अब उन्हें कैसे नहीं मारोगे?
katham asmadvidhaḥ kṛṣṇa jānan dharmaṃ sanātanam | nyastaśastre ca vṛddhe ca prahared dhi pitāmahe ||
vāyudeva uvāca |
pratijñāya vadhaṃ jiṣṇo purā bhīṣmasya saṃyuge | kṣatradharme sthitaḥ pārtha kathaṃ nainaṃ haniṣyasi ||
វាយុបាននិយាយថា៖ «ឱ ក្រឹෂ್ಣ! មនុស្សដូចខ្ញុំ ដែលដឹងធម៌សនាតនៈ នឹងអាចប្រហារលើជីតាចាស់ជរារបស់ខ្លួន ដែលបានដាក់អាវុធចុះហើយ ដូចម្តេចបាន?» វាយុបន្តថា៖ «ឱ ជិષ្ណុ (អរជុន)! អ្នកធ្លាប់ស្បថក្នុងសមរភូមិថា នឹងនាំឲ្យភីស្មស្លាប់។ ឈរមាំក្នុងធម៌ក្សត្រិយៈ ឱ បារថៈ! តើអ្នកនឹងមិនសម្លាប់លោកឥឡូវនេះ ដូចម្តេចបាន?»
वायुदेव उवाच