भीष्मवधोपाय-प्रश्नः (Inquiry into the means to overcome Bhīṣma) | Chapter 103
दुर्योधनस्तदा राजजन्नार्ष्पशृद्धिमभाषत । एष कार्ष्णिमहाबाहो द्वितीय इव फाल्गुन:,भरतवंशी नरेश! पूर्णिमाके दिन वायुके थपेड़ोंसे उद्वेलित हुए समुद्रकी गर्जनाके समान आपकी सेनाका वह भयंकर चीत्कार सुनकर उस समय दुर्योधनने राक्षस ऋष्यशंगपुत्र अलम्बुषसे इस प्रकार कहा--“महाबाहो! यह अर्जुनका पुत्र द्वितीय अर्जुनके समान पराक्रमी है
sañjaya uvāca | duryodhanas tadā rājan nārṣaśṛṅgim abhāṣata | eṣa kārṣṇir mahābāho dvitīya iva phālgunaḥ ||
សញ្ជ័យបាននិយាយថា៖ ព្រះមហាក្សត្រ! នៅពេលនោះ ទុర్యោធន បានហៅអលម្បុសា កូនរបស់ឥស្យស្រឹង្គ ហើយនិយាយថា៖ «ឱ មហាបាហូ! ការិស្នីនេះ មានសមត្ថភាពដូចជាផាល់គុន (អរជុន) ទីពីរ»។
संजय उवाच