आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः
Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition
विमुखाउ्छात्रवान् सर्वान् कारयिष्यति मे सुत: । बाल: प्रविश्य च व्यूहमभेद्यं विचरिष्यति,“देवताओ! एक दिन जब कि उस युद्धमें नर और नारायण (अर्जुन और श्रीकृष्ण) उपस्थित न रहेंगे, उस समय शत्रुपक्षके लोग चक्रव्यूहकी रचना करके आप-लोगोंके साथ युद्ध करेंगे। उस युद्धमें मेरा यह पुत्र समस्त शत्रु-सैनिकोंको युद्धसे मार भगायेगा और बालक होनेपर भी उस अभेद्य व्यूहमें घुसकर निर्भय विचरण करेगा
vaiśampāyana uvāca | vimukhaucchātravān sarvān kārayiṣyati me sutaḥ | bālaḥ praviśya ca vyūham abhedyaṃ vicariṣyati |
វៃសម្បាយនៈ បាននិយាយថា៖ «កូនប្រុសរបស់ខ្ញុំនឹងបណ្តេញសត្រូវទាំងអស់ឲ្យរត់ខ្ចាត់ខ្ចាយ ដកហូតមោទនភាព និងការពាររបស់ពួកគេ។ ទោះជាក្មេងក៏ដោយ គាត់នឹងចូលទៅក្នុងទម្រង់យុទ្ធសាស្ត្រដែលមិនអាចបំបែកបាន ហើយដើរទៅមកនៅក្នុងនោះដោយមិនភ័យខ្លាច»។
वैशम्पायन उवाच