आकाशमेघवर्णनम् / Description of the Sky Filled with Rain-Clouds
अड-#-#रू- दाविशोद्ध्याय: नागोंद्वारा य४22505%0 प्ूछको काली बनाना; कद्भू और विनताका देखते हुए आगे बढ़ना सौतिरुवाच नागाश्च संविदं कृत्वा कर्तव्यमिति तद्बच: । नि:स्नेहा वै दहेन्माता असम्प्राप्तमनोरथा,उग्रश्रवाजी कहते हैं--महर्षियो! इधर नागोंने परस्पर विचार करके यह निश्चय किया कि “हमें माताकी आज्ञाका पालन करना चाहिये। यदि इसका मनोरथ पूरा न होगा तो वह स्नेहभाव छोड़कर रोषपूर्वक हमें जला देगी। यदि इच्छा पूर्ण हो जानेसे प्रसन्न हो गयी तो वह भामिनी हमें अपने शापसे मुक्त कर सकती है; इसलिये हम निश्चय ही उस घोड़ेकी पूँछको काली कर देंगे”
Sautiḥ uvāca—nāgāś ca saṃvidaṃ kṛtvā kartavyam iti tad vacaḥ | niḥsnehā vai dahen mātā asamprāptamanorathā ||
សៅទី (Sauti) បាននិយាយថា៖ ពួកនាគ (Nāga) បានប្រជុំគ្នាពិភាក្សា ហើយសម្រេចថា «ពាក្យបញ្ជានោះត្រូវតែអនុវត្ត។ ព្រោះបើបំណងរបស់មាតាមិនបានសម្រេច នាង—បោះបង់សេចក្តីស្រឡាញ់—អាចខឹងហើយដុតយើង។ បើបំណងបានបំពេញ នាងស្ត្រីក្តៅគគុកនោះអាចដោះលែងយើងពីបណ្តាសា។ ដូច្នេះ យើងនឹងធ្វើឲ្យកន្ទុយសេះនោះខ្មៅជាក់ជាមិនខាន»។
शौनक उवाच