Gaṅgādvāra-tīrtha, Ulūpī-saṃvāda, and Arjuna’s Dharma-Deliberation (गङ्गाद्वार-तीर्थम्, उलूपी-संवादः)
विविधैरपि निर्विद्धिः शस्त्रोपेतै: सुसंवृतैः: । शक्तिभिश्षावृतं तद्धि द्विजिद्वैरिव पन्नगै:,नाना प्रकारके अभेद्य तथा सब ओरसे घिरे हुए शस्त्रागारोंमें शस्त्र संग्रह करके रखे गये थे। नगरके चारों ओर हाथसे चलायी जानेवाली लोहेकी शक्तियाँ तैयार करके रखी गयी थीं, जो दो जीभोंवाले साँपोंके समान जान पड़ती थीं। इन सबके द्वारा उस नगरकी सुरक्षा की गयी थी
vividhair api nirviddhiḥ śastropetaiḥ susaṃvṛtaiḥ | śaktibhiḥ śāvṛtaṃ taddhi dvijidvair iva pannagaiḥ ||
ព្រះវាយុមានព្រះបន្ទូលថា៖ «ចូរដឹងថា វាត្រូវបានការពារជាច្រើនវិធី—បិទបាំងរឹងមាំ និងបំពាក់ដោយអាវុធ។ ពិតប្រាកដណាស់ បន្ទាយនោះត្រូវបានព័ទ្ធជុំវិញដោយស្ពានព្រួញ និងអាវុធបោះធ្វើពីដែក ដូចពស់មានអណ្តាតពីរ; ដោយការរៀបចំបែបនេះ ការពារទីក្រុងត្រូវបានរក្សាទុកយ៉ាងមាំមួន។»
वायुदेव उवाच