Ādi Parva, Adhyāya 188 — Draupadī-Vivāha Dharma-Vicāra
Debate on the Legitimacy of One Wife for Five
य एष सिंहर्षभखेलगामी महद्धनुः कर्षति तालमात्रम् । एषोडर्जुनो नात्र विचार्यमस्ति यद्यस्मि संकर्षण वासुदेव:,'भैया संकर्षण! ये जो श्रेष्ठ सिंहके समान चालसे लीलापूर्वक चल रहे हैं और तालके- बराबर विशाल धनुषको खींच रहे हैं, ये अर्जुन ही हैं; इसमें विचार करनेकी कोई बात नहीं है। यदि मैं वासुदेव हूँ तो मेरी यह बात झूठी नहीं है और ये जो बड़े वेगसे वृक्ष उखाड़कर सहसा समस्त राजाओंका सामना करनेके लिये उद्यत हुए हैं, भीमसेन हैं; क्योंकि इस समय पृथ्वीपर भीमसेनके सिवा दूसरा कोई ऐसा वीर नहीं है, जो युद्ध-भूमिमें यह अद्भुत पराक्रम कर सके
ya eṣa siṁharṣabha-khela-gāmī mahad-dhanuḥ karṣati tāla-mātram | eṣo 'rjuno nātra vicāryam asti yady asmi saṅkarṣaṇa vāsudevaḥ ||
«ឱ សង្កರ್ಷណ! អ្នកនេះដែលដើរលេងដោយស្រួលស្រាល ដូចសិង្ហក្នុងចំណោមគោឧសភៈ ហើយទាញធ្នូធំមហិមា ដល់កម្រិតមួយតាលា—គាត់គឺអរជុន; មិនចាំបាច់សង្ស័យឡើយ។ ប្រសិនបើខ្ញុំជាវាសុទេវ នោះពាក្យខ្ញុំមិនមែនកុហកទេ»។
वैशम्पायन उवाच