और्वोपाख्यानम्
Aurva Episode: Restoration of Sight and Restraint of World-Destructive Anger
पुरा हिमवतश्नैषा हेमशूज्राद् विनिस्सृता | गड्ढा गत्वा समुद्राम्भ: सप्तथा समपद्यत,प्राचीन कालमें हिमालयके स्वर्णशिखरसे निकली हुई गंगा सात धाराओंमें विभक्त हो समुद्रमें जाकर मिल गयी हैं। जो पुरुष गंगा, यमुना, प्लक्षकी जड़से प्रकट हुई सरस्वती, रथस्था, सरयू, गोमती और गण्डकी--इन सात नदियोंका जल पीते हैं, उनके पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। ये गंगा बड़ी पवित्र नदी हैं। एकमात्र आकाश ही इनका तट है। गन्धर्व! ये आकाशकभमार्गसे विचरती हुई गंगा देवलोकमें अलकनन्दा नाम धारण करती हैं। ये ही वैतरणी होकर पितृलोकमें बहती हैं। वहाँ पापियोंके लिये इनके पार जाना अत्यन्त कठिन होता है। इस लोकमें आकर इनका नाम गंगा होता है। यह श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासजीका कथन है
purā himavataḥ śṛṅgād hemaśṛṅgād vinisṛtā | gaḍḍhāṃ gatvā samudrāmbhaḥ saptadhā samapadyata ||
អរជុនបាននិយាយថា៖ «កាលពីបុរាណ គង្គាដែលហូរចេញពីកំពូលមាសនៃហិមាល័យ បានហូរទៅដល់សមុទ្រ ហើយបែកចេញជាស្ទ្រីមប្រាំពីរ»។
अजुन उवाच