Post–Baka-vadha Residence and the Introduction of Yājñasenī’s Svayaṃvara (आदि पर्व, अध्याय १५३)
तां तथा मानुषं रूपं बिभ्रतीं सुमनोहरम् । पुंस्कामां शड्कमानश्नव चुक्रोध पुरुषादक:,उसे इस प्रकार सुन्दर एवं मनोहर मानव-रूप धारण किये देख राक्षसके मनमें यह संदेह हुआ कि हो-न-हो यह पतिरूपमें किसी पुरुषका वरण करना चाहती है। यह विचार मनमें आते ही वह कुपित हो उठा
ឃើញនាងកាន់កាប់រូបមនុស្សដ៏ស្រស់ស្អាត និងគួរឱ្យចិត្តរីករាយដូច្នោះ នាគ្សសាអ្នកស៊ីមនុស្សក៏សង្ស័យថា នាងប្រាកដជាប្រាថ្នាជ្រើសរើសបុរសម្នាក់ជាស្វាមី។ គំនិតនោះទើបកើតឡើង កំហឹងក៏ផ្ទុះឡើងក្នុងចិត្តវា។
वैशग्पायन उवाच