Hiḍimbā’s Account and the Bhīma–Hiḍimba Engagement (आदि पर्व, अध्याय १४२)
दुर्योधन उवाच मध्यस्थ: सततं भीष्मो द्रोणपुत्रो मयि स्थित: । यतः: पुत्रस्ततो द्रोणो भविता नात्र संशय:,दुर्योधन बोला--पिताजी! भीष्म तो सदा ही मध्यस्थ हैं, द्रोणपुत्र अश्वत्थामा मेरे पक्षमें हैं, द्रोणाचार्य भी उधर ही रहेंगे, जिधर उनका पुत्र होगा--इसमें तनिक भी संशय नहीं है
duryodhana uvāca madhyasthaḥ satataṃ bhīṣmo droṇaputro mayi sthitaḥ | yataḥ putras tato droṇo bhavitā nātra saṃśayaḥ ||
ឌុរយោធនបាននិយាយថា៖ «ព្រះបិតា! ភីष្មតែងតែឈរជាមធ្យಸ್ಥ។ តែកូនទ្រូណ គឺអશ્વត្ថាមា ឈរខាងខ្ញុំ។ ហើយទីណាមានកូន ទីនោះទ្រូណក៏នឹងនៅដែរ—គ្មានសង្ស័យឡើយ»។
दुर्योधन उवाच