Pāṇḍu’s Marriages, Conquests, and Triumphal Return (पाण्डोर्विवाह-विजय-प्रत्यागमनम्)
तेषां पिता यथा स्वामी तथा माता न संशय: । विधानविहित: सत्यं यथा मे प्रथम: सुतः,“विद्वन! माता और पिता दोनोंसे पुत्रोंका जन्म होता है, अत: उनपर दोनोंका समान अधिकार है। जैसे पिता पुत्रोंका स्वामी है, उसी प्रकार माता भी है। इसमें संदेह नहीं है। ब्रह्मर्ष! विधाताके विधान या मेरे पूर्वजन्मोंके पुण्यसे जिस प्रकार तुम मेरे प्रथम पुत्र हो, उसी प्रकार विचित्रवीर्य मेरा सबसे छोटा पुत्र था। जैसे एक पिताके नाते भीष्म उसके भाई हैं, उसी प्रकार एक माताके नाते तुम भी विचित्रवीर्यके भाई ही हो। बेटा! मेरी तो ऐसी ही मान्यता है; फिर तुम जैसा समझो। ये सत्यपराक्रमी शान्तनुनन्दन भीष्म सत्यका पालन कर रहे हैं
teṣāṃ pitā yathā svāmī tathā mātā na saṃśayaḥ | vidhāna-vihitaḥ satyaṃ yathā me prathamaḥ sutaḥ |
វៃសម្បាយនៈបាននិយាយថា៖ «ដូចឪពុកជាម្ចាស់ និងអ្នកអាណាព្យាបាលកូនយ៉ាងណា ម្តាយក៏ដូច្នោះដែរ—គ្មានសង្ស័យឡើយ។ តាមការកំណត់របស់វាសនា អ្នកជាកូនដំបូងរបស់ខ្ញុំ; ហើយដូចគ្នានេះ វិចិត្រវីរយៈជាកូនពៅរបស់ខ្ញុំ។ ដូចភីស្មៈជាបងប្អូនរបស់គាត់តាមខាងឪពុក អ្នកក៏ជាបងប្អូនរបស់គាត់តាមខាងម្តាយដែរ។ នេះជាការជឿជាក់របស់ខ្ញុំ; ចូរធ្វើតាមដែលអ្នកយល់សម។ ក្នុងការរក្សាសច្ចៈនេះ ភីស្មៈ កូនសន្តនុ កំពុងថែរក្សាធម៌យ៉ាងស្មោះត្រង់។»
वैशम्पायन उवाच