बृहन्नडाप्रवेशः — Bṛhannadā’s Entry into Virāṭa’s Assembly
कस्यासि राज्ञों विषयादिहागतः कि वापि शिल्पं तव विद्यते कृतम् । कथं त्वमस्मासु निवत्स्यसे सदा वदस्व कि चापि तवेह वेतनम्,तुम किस राजाके राज्यसे यहाँ आये हो? और तुमने किस कलाकी शिक्षा प्राप्त की है? बोलो, हमारे यहाँ कैसे सदा रह सकोगे? और यहाँ तुम्हारा वेतन क्या होगा?
「汝はどの王の国土よりここへ来たのか。いかなる技芸を学び身につけたのか。言え、いかにして我らのもとに常住できようか。ここでの報酬は何とするのだ。」
विराट उवाच